Friday, February 26, 2021
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China India; #BoycottChineseProducts #BoycottChina! | China Share In India Trade Increased By 3.3 Percent Amid Boycott Chinese Products | हम बायकॉट-बायकॉट चिल्लाते रहे, लेकिन इस दौरान इम्पोर्ट में चीन का शेयर 3% बढ़ गया; दो साल बाद चीन फिर सबसे बड़ा कारोबारी देश बना

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2 घंटे पहले

आज से 8 महीने पीछे चलते हैं। 15-16 जून की रात। लद्दाख की गलवान घाटी में भारत-चीन की सेना के बीच हिंसक झड़प हुई। इस झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हुए। चीन के भी 40 सैनिक मारे गए। इसके बाद सोशल मीडिया पर चीन के खिलाफ कैंपेन शुरू हो गया। #boycottchineseproducts और #boycottchina जैसे हैशटैग ट्रेंड होने लगे। लेकिन क्या सोशल मीडिया पर चीनी सामानों को बायकॉट करने की जो मुहिम चलाई गई थी, वो कामयाब हुई? आंकड़े तो इसे नकारते हैं।

मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की वेबसाइट पर नवंबर 2020 तक के आंकड़े मौजूद हैं। इसके मुताबिक 2020-21 में अप्रैल से नवंबर के बीच भारत ने विदेशों से जितना सामान खरीदा, उसमें से 18% चीन से आया। अगर इसकी तुलना अप्रैल से नवंबर 2019 के आंकड़ों से की जाए, तो ये शेयर 15% के आसपास है। यानी, सिर्फ 8 महीने में भारत के कुल इम्पोर्ट में चीन की हिस्सेदारी 3% बढ़ गई।

ये तब हुआ, जब भारत का इम्पोर्ट 28% से ज्यादा घट गया। हालांकि चीन से इम्पोर्ट भी 12% से ज्यादा घटा है। इसके बावजूद कुल इम्पोर्ट में चीन की हिस्सेदारी बढ़ने का मतलब है कि हमने चीन से ज्यादा सामान खरीदा।

अप्रैल से नवंबर के बीच भारत ने 16.33 लाख करोड़ रुपए का सामान दूसरे देशों से खरीदा। इसमें से 2.89 लाख करोड़ रुपए का सामान चीन से आया। इसी तरह से भारत ने करीब 13 लाख करोड़ का सामान दूसरे देशों को बेचा। इसमें से 1 लाख करोड़ से ज्यादा सामान चीन को बेचा गया।

सबसे ज्यादा कारोबार में चीन दो साल बाद फिर आगे

2011-12 से पहले तक यूएई हमारा सबसे बड़ा कारोबारी देश हुआ करता था, लेकिन उसके बाद यूएई की जगह चीन ने ले ली। 2011-12 से लेकर 2017-18 तक चीन हमारा सबसे बड़ा कारोबारी देश बना रहा।

लेकिन, 2018-19 में चीन की जगह अमेरिका ने ले ली और अमेरिका भारत का सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार बन गया। दो साल तक अमेरिका ही भारत का सबसे बड़ा कारोबारी देश रहा।

अब चीन फिर पहले नंबर पर आ गया है। 2020-21 में अप्रैल से नवंबर के बीच भारत और चीन के बीच 3.91 लाख करोड़ रुपए का कारोबार हुआ है, लेकिन चीन के साथ कारोबार करने में सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि इसके साथ हमारा ट्रेड बैलेंस बहुत ज्यादा रहता है। मतलब कि चीन से हमने खरीदा ज्यादा और उसे बेचा कम। अप्रैल से नवंबर के बीच ही चीन के साथ हमारा ट्रेड बैलेंस 1.87 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा रहा।

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