Friday, February 26, 2021
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In the renewal of the health policy, the policy holders will have to pay more charge, the earnings of hospitals y {] r | हेल्थ पॉलिसी के रिन्यूअल में पॉलिसी धारकों को देना होगा ज्यादा चार्ज, अस्पतालों की कमाई बढ़ी

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मुंबईकुछ ही क्षण पहले

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  • अस्पताल स्टैंडर्ड रेट्स का पालन नहीं भी कर रहे हैं तो भी पॉलिसी धारकों को पूरा पेमेंट्स मिलना चाहिए
  • IRDAI ने कहा है कि जनरल इंश्योरेंस कंपनियां कोविड-19 के दावों को निपटाने में देरी न करें

बीमा रेगुलेटर भारतीय बीमा विकास प्राधिकरण (IRDAI) के एक आदेश से हेल्थ बीमा पॉलिसी लेने वाले ग्राहकों की चांदी हो गई है। अस्पताल भी अच्छा खासा कमाएंगे। लेकिन बीमा कंपनियों पर इसका बहुत बड़ा बोझ पड़ने वाला है। यह बोझ बीमा कंपनियां पॉलिसीज के रिन्यूअल के समय ग्राहकों पर डालने वाली हैं।

क्लेम को निपटाने में देरी न करें बीमा कंपनियां

IRDAI ने कहा है कि जनरल इंश्योरेंस कंपनियां कोविड-19 के दावों को निपटाने में देरी न करें। अगर अस्पताल स्टैंडर्ड रेट्स का पालन नहीं भी कर रहे हैं तो भी पॉलिसी धारकों को पूरा पेमेंट्स मिलना चाहिए। कोरोना महामारी के दौरान पॉलिसी धारकों की सबसे बड़ी चिंता बीमा कंपनियों का हॉस्पिटलाइजेशन के बिल का सही पेमेंट न करना रहा है। बीमा कंपनियों का कहना है कि अस्पताल मनमाना चार्ज लगा रहे हैं।

कुछ भी चार्ज लगा रहे हैं अस्पताल

बीमा कंपनियों का कहना है कि अस्पताल कोरोना में बिलों में कुछ भी जोड़ रहे हैं। यहां तक कि वे साफ-सफाई का भी बिल लगा रहे हैं। जबकि साफ-सफाई तो अस्पताल का खुद का खर्च है। बीमा कंपनियां कहती हैं कि पॉलिसीधारकों को फायदा होना चाहिए, लेकिन हमारे लिए यह नुकसान वाला है। क्योंकि इसमें हॉस्पिटलों की गलती है। हम सलाह के मुताबिक क्लेम्स का भुगतान कर देंगे, लेकिन नियमों का पालन नहीं करने के लिए क्या अस्पतालों पर चार्ज नहीं किया जाना चाहिए?

अस्पताल पैकेज रेट को बढ़ा रहे हैं

बीमा कंपनियों का दावा है कि कई अस्पताल पैकेज रेट को बढ़ा रहे हैं और इसका खामियाजा बीमा कंपनियों को भुगतना पड़ता है। जीआई काउंसिल ने एक रेट तय किया है। कुछ राज्यों में तो राज्य सरकारों ने भी एक रेट तय किया है। यानी इस रेट से ज्यादा रेट अस्पताल नहीं ले सकते हैं। इसके मुताबिक, नेशनल एक्रेडिशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (NABH) से जुड़े हुए हॉस्पिटलों में 10,000 रुपए से ज्यादा खर्च रोज का नहीं होना चाहिए। इसमें PPE कॉस्ट (पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट) की कीमत 1,200 रुपए है। यह इसी 10 हजार में शामिल है।

8 हजार रुपए प्रतिदिन से ज्यादा का बिल नहीं बना सकते

गैर-NABH अस्पतालों के मामले में यह रकम 8,000 रुपए प्रतिदिन है। इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में भर्ती होने वाले बीमार मरीजों के लिए हॉस्पिटल का प्रतिदिन का खर्च 18,000 रुपए (गैर-NABH हॉस्पिटल के लिए 15,000 प्रतिदिन) तय किया गया है। इसमें PPE की कीमत दो हजार रुपए होगी।

अस्पताल स्टैंडर्ड दरों का पालन नहीं कर रहे हैं

यहीं पर बीमा कंपनियों का सवाल आता है। वे कहती हैं कि इन स्टैंडर्ड दरों का अस्पताल पालन नहीं कर रहे। सरकार को ऐसे हॉस्पिटलों को ये दरें मानने के लिए मजबूर करना चाहिए। बीमा कंपनियों ने भी इसके लिए अब नया रास्ता निकाल लिया है। उनका कहना है कि हम रेगुलेटर के आदेश के हिसाब से बिल तो पेमेंट कर देंगे, लेकिन जब पॉलिसी का रिन्यूअल होगा तो उसमें पॉलिसीधारक को ज्यादा पैसा चुकाना पड़ेगा।

रूम किराए में भी मनमानी वसूली

बीमा कंपनियों का कहना है कि रूम के किराए में भी मनमाना वसूली अस्पताल कर रहे हैं। अस्पतालों ने टेंपरेचर चेक फीस, PPE किट फीस और क्लीनिंग फीस जैसे नए चार्ज लगाना शुरू कर दिया। वैसे रेगुलेटर के इस फैसले से पॉलिसीधारकों को रीइंबर्समेंट या दावों का पेमेंट जल्दी होगा। लेकिन मामला आगे रिन्यूअल में अटकेगा। क्योंकि बीमा कंपनियों को अभी भी ऊंचे क्लेम रेशियो से जूझना पड़ेगा। इसका मतलब यह है कि प्रीमियम के रूप में लिए गए हर 100 रुपए पर बीमा कंपनी को क्लेम के रूप में 101 या उससे ज्यादा देने होंगे।। इससे रिन्यूअल के वक्त पर हेल्थ पॉलिसीज में कीमतें ऊपर जाएंगी।

6,650 करोड़ रुपए का क्लेम दिया कंपनियों ने

फरवरी के पहले हफ्ते तक बीमा कंपनियां 6,650 करोड़ रुपए के कोविड-19 से संबंधित हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम सेटल कर चुकी हैं। अब तक करीब 13,100 करोड़ रुपए के हॉस्पिटलाइजेशन क्लेम दाखिल किए गए हैं। हाल के दिनों में ऐसा देखा गया है कि खासतौर पर जिन लोगों के पास हेल्थ कवर होता है, अस्पताल उनसे ज्यादा बिल वसूलते हैं। कुछ मामलों में तो वे मरीज को भर्ती भी नहीं करते हैं।

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