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Tuesday, March 2, 2021
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He does not forget the creepy scene, seven corpses were lying, everyone’s neck was severed, Shabnam roared in the midst of these corpses. | चाचा-चाची कहते हैं- हम शबनम की लाश भी नहीं लेंगे; उसका यहां कुछ नहीं है, उसके बेटे को भी कोर्ट नाजायज बता चुका है

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नई दिल्ली2 घंटे पहलेलेखक: पूनम कौशल

शबनम ने सलीम के साथ मिलकर परिवार के सभी सात लोगों की हत्या कर दी थी। इनमें एक दस महीने का बच्चा भी था। घर से लगे बाग में उन सातों की कब्रें हैं।

  • 13 साल पहले शबनम ने प्रेमी के साथ मिलकर अपने परिवार के सात लोगों की हत्या कर दी थी
  • हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट ने शबनम की सजा बरकरार रखी है, राष्ट्रपति भी दया याचिका खारिज कर चुके हैं

उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के बावनखेड़ी गांव में इस समय मीडिया की गाड़ियां रोज आ-जा रही हैं। गांव के एक दुमंजिला मकान के सामने लोगों की भीड़ जमा है। यह शबनम का घर है, जिसने 13 साल पहले प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने परिवार के सात लोगों की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी थी, क्योंकि परिवार उनकी शादी में अड़चन डाल रहा था।

शबनम और सलीम को इस मामले में फांसी की सजा सुनाई गई है। जिसे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा है। राष्ट्रपति भी दया याचिका खारिज कर चुके हैं। दोनों का डेथ वारंट कभी भी जारी हो सकता है। शबनम आजाद भारत की पहली महिला है, जिसे फांसी दी जाएगी। इन्हीं सब वजहों से बावनखेड़ी सुर्खियों में है। कैमरे और माइक देखते ही गांव के लोग यहां जुट जाते हैं, लेकिन शबनम के बारे में सवाल पूछने पर ज्यादातर लोग बिना कुछ बोले ही चले जाते हैं।

14 अप्रैल 2008 की उस रात हुआ क्या था
गांव के बुजुर्ग रियासत अली बहुत कुरेदने पर उस हत्याकांड वाली रात को याद करते हैं। वे कहते हैं, ‘उस रात गांव में हल्की बूंदा-बांदी हुई थी। रात के करीब डेढ़-दो बजे होंगे। तभी गांव के बाहरी छोर पर बने एक बड़े दुमंजिला मकान से चीखने की आवाजें आने लगीं। हड़बड़ाकर हम लोग उस घर की तरफ दौड़े और जो खौफनाक मंजर वहां देखा, वो भुलाए नहीं भूलता। सात लाशें पड़ी हुई थीं। सबके गले कटे हुए थे। बहता हुआ ताजा इंसानी खून सिहरन पैदा कर रहा था। जो जहां सोया था, वहीं मार दिया गया था। इन सात लाशों के बीच जिंदा बची घर की अकेली बेटी शबनम दहाड़ मार कर रो रही थी। एक बच्चा भी मरा पड़ा था। उसे देख मैं कांपने लगा और फिर वहां से चला आया।’

इन्हीं कमरों में शबनम ने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर सात लोगों की हत्या की थी। दीवारों पर दिख रहे खून के धब्बे आज भी उस मंजर की गवाही दे रहे हैं।

इन्हीं कमरों में शबनम ने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर सात लोगों की हत्या की थी। दीवारों पर दिख रहे खून के धब्बे आज भी उस मंजर की गवाही दे रहे हैं।

‘बाप की लाश पर रो रही बेटी पर भला किसे शक होता’
शबनम के चाचा सत्तार अली कहते हैं कि जब हम पहुंचे तो शबनम चिल्ला रही थी, मेरे पापा को काट दिया, हाय रे, सबको मार डाला। मेरे भाई, भाभी, भतीजे सबको मार डाला। दूसरी मंजिल पर बने कमरे की दीवार पर खून के धब्बों को दिखाते हुए सत्तार अली कहते हैं, ‘यहां मेरे छोटे भाई राशिद की लाश पड़ी थी। जब दोनों ने (शबनम-सलीम) उसका गला काटा तो वो हिल रहा था। तब शबनम उसके पैरों पर बैठ गई और सलीम ने मेरे भाई का गला काट दिया। तेजी से निकली खून की धार ऊपर दीवार पर जा लगी।’ वे आगे कहते हैं, ‘बड़े भतीजे और बहू की लाश के बीच में बच्चा पड़ा था। मुझे लगा वो जिंदा होगा। गोद में उठाकर सीने से लगाया तो वो भी मरा निकला। उसका गला दबाया गया था।’

सत्तार अली कहते हैं, ‘शबनम ने सबको बताया कि घर में घुसे बदमाश परिवार की हत्या कर भाग गए हैं। बाप की लाश के पास रो रही बेटी पर भला किसे शक हो सकता था। हम लोगों के तो ख्याल से भी परे था कि कोई बेटी अपने पूरे परिवार का इस बेरहमी से कत्ल कर सकती है।’

पुलिस ने 72 घंटे में खोल दिया था कत्ल का राज
डकैती और एक परिवार के सात लोगों की हत्या की खबर के बाद रात में ही गांव में अमरोहा के जिला मुख्यालय से लेकर लखनऊ तक के पुलिस अफसर पहुंचने लगे थे। जांच के शुरुआती घंटों में ही पुलिस को शक हो गया था कि कातिल जो भी है घर में ही है। कानून-व्यवस्था पर उठते सवालों के बीच तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती भी वारदात के एक दिन बाद गांव पहुंचीं और शबनम काे ढांढस बंधाया।

शबनम को सबकी सहानुभूति मिल रही थी, लेकिन पुलिस ने 72 घंटे के भीतर ही घटना का सच सामने ला दिया। पुलिस ने खुलासे में बताया कि शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर पहले पूरे परिवार को दूध में मिलाकर नशा दिया और फिर गला रेत दिया।

शबनम की चाची फातिमा को उसे लेकर कोई अफसोस नहीं है। बात करते-करते वे अपनी हंसी छुपाने की कोशिश करती हैं, लेकिन उनके चेहरे पर हंसी आ ही जाती है।

शबनम की चाची फातिमा को उसे लेकर कोई अफसोस नहीं है। बात करते-करते वे अपनी हंसी छुपाने की कोशिश करती हैं, लेकिन उनके चेहरे पर हंसी आ ही जाती है।

शबनम का परिवार संपन्न था, सलीम आरा मशीन पर काम करता था
शबनम के पिता शिक्षक थे और परिवार आर्थिक रूप से संपन्न था। एक बड़े बाग के कोने में बना उनका दुमंजिला घर इसकी तस्दीक करता है। मारे गए सातों लोग इसी घर के परिसर में एक कतार में दफन हैं। सबसे पहले बड़े भाई की कब्र है, फिर छोटे भाई की, फिर पिता, मां, भाभी और फुफेरी बहन की कब्रे हैं। आखिर में मासूम बच्चे की छोटी सी कब्र है।

हत्याकांड के वक्त शबनम 27 साल की थी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इस इलाके में आमतौर पर 20-22 की होते-होते लड़कियों की शादी कर दी जाती है, लेकिन एमए पास शबनम गांव के ही स्कूल में शिक्षामित्र थी और आगे भी पढ़ना चाहती थी। शबनम की चाची फातिमा तंज के लहजे में कहती हैं, ‘रिश्ते आते थे तो वो मना कर देती थी। कहती थी कि अपनी पसंद से शादी करूंगी।’

शबनम और सलीम के प्रेम प्रसंग के बारे में पूछने पर बहुत कम लोग बोलते हैं। गांव वालों से अलग-अलग बात करने पर कुल मिलाकर यह समझ में आता है कि सलीम-शबनम के इश्क की भनक परिजनों को लगी तो शबनम पर बंदिशें लगाई जाने लगीं। शबनम किसी भी कीमत पर सलीम से शादी करना चाहती थी, लेकिन ये आसान नहीं था। दोनों की जाति भी अलग थी और आर्थिक स्थिति भी। शबनम सैफी बिरादरी की थी और सलीम पठान। शबनम शिक्षामित्र थी और जल्द स्थायी शिक्षिका बन जाती, जबकि सलीम एक आरा मशीन पर काम करता था।

सलीम के एक खास दोस्त अपना नाम न जाहिर करते हुए कहते हैं, ‘मैं जानता था शबनम से उसका चक्कर चल रहा है। शबनम उससे शादी करके घर बसाना चाहती थी, लेकिन सलीम की नजर शबनम से ज्यादा उसकी प्रॉपर्टी पर थी।’ वे कहते हैं, ‘शबनम उसके लिए बहुत कुछ करती थी। उसे पैसे भी देती थी। वो जब उससे शादी की जिद करती तो वो कहता कि तेरा परिवार बीच में है। इसी दौरान शबनम प्रेग्नेंट हो गई थी। इसके बाद सलीम पर शादी का दबाव और बढ़ गया था।’

शबनम के चाचा सत्तार अली कहते हैं कि अब उसका इस गांव-घर में कुछ नहीं है। जबकि गांव के कुछ लोग कहते हैं कि संपत्ति शबनम के बेटे को मिले या सरकार उसे जब्त कर ले।

शबनम के चाचा सत्तार अली कहते हैं कि अब उसका इस गांव-घर में कुछ नहीं है। जबकि गांव के कुछ लोग कहते हैं कि संपत्ति शबनम के बेटे को मिले या सरकार उसे जब्त कर ले।

सलीम के दोस्त बताते हैं, ‘उसने शबनम से कहा था कि क्या तू मुझे पाने के लिए अपने परिवार को खत्म कर सकती है? सलीम को लगा था कि इस बात से शबनम पीछे हट जाएगी, लेकिन वो दोनों इतना आगे बढ़ गए कि कोई सोच भी नहीं सकता था।’

शबनम के घर के सामने जुटी भीड़ में गांव की कुछ लड़कियां भी दिखती हैं, लेकिन पूछने पर कुछ बोलती नहीं हैं। शबनम की एक सहेली कुछ बोलना चाह रही थी, लेकिन उसके पति ने उसे कुछ भी कहने से रोक दिया। गांव मुस्लिम आबादी बहुल है। कुछ युवा लड़के शबनम की बात करने पर मुस्करा देते हैं, उनके बीच हंसी-मजाक शुरू हो जाता है।

क्या शबनम और सलीम की लव मैरिज हो सकती थी, इस सवाल पर लोग कहते हैं यहां गांव में कोई लव मैरिज-वैरिज नहीं करता। लेकिन, शबनम की चाची फातिमा कहती हैं, ‘अगर वो भाग जाती तो इतना बड़ा कांड तो ना होता। बाद में सब ठीक हो जाता।’ जो कुछ लोग इस बारे में बोलते हैं, वे मानते हैं कि शबनम और सलीम ने सोचा था कि पूरे परिवार के खात्मे के बाद सारी प्रॉपर्टी उनकी हो जाएगी और दोनों शादी करके साथ रहेंगे। यह हत्याकांड इसी का नतीजा है, लेकिन अब दोनों अलग-अलग जेलों में बंद हैं और फांसी की सजा का इंतजार कर रहे हैं।

जेल में रहते हुए शबनम ने एक बेटे को जन्म दिया जो अब बुलंदशहर में एक पत्रकार के घर पल रहा है। गांव की ही एक बुजुर्ग औरत कहती हैं, ‘उसका एक बेटा है, उसे फांसी नहीं होनी चाहिए, भले ही वो कभी जेल से ना छूटे।’ कुछ और भी लोग कहते हैं कि शबनम लंबा वक्त जेल में काट चुकी है और उसे फांसी देने से कुछ हासिल नहीं होगा, लेकिन पड़ोस के गांव से आए प्रेमपाल कहते हैं, ‘शबनम को फांसी लगनी ही चाहिए। हम सबकी भी औलादे हैं। अगर सजा न मिली तो कोई भी मां-बाप का टेंटुआ दबा देगा।’

सलीम के पिता रऊफ खान खाने-पीने के सामान की एक छोटी सी दुकान चलाते हैं। उनका परिवार बावनखेड़ी के पास के ही मजरे बड़ई में रहता है।

सलीम के पिता रऊफ खान खाने-पीने के सामान की एक छोटी सी दुकान चलाते हैं। उनका परिवार बावनखेड़ी के पास के ही मजरे बड़ई में रहता है।

शबनम के घर में अब उसके चाचा का परिवार रहने लगा है
शबनम के घर में अब उसके चाचा सत्तार अली का परिवार रह रहा है। जमीन भी अब उनके पास ही है। क्या वो शबनम के बेटे को प्रॉपर्टी में हिस्सा देंगे? इस सवाल पर वो कहते हैं, ‘उसके बेटे को तो अदालत ही नाजायज मानती है, उसका इस जमीन में हिस्सा कैसे हो सकता है?’ शबनम की चाची फातिमा कहती हैं, ‘हम तो उसकी लाश भी नहीं लेंगे। अब उसका यहां कुछ नहीं है। उसने खुद ही सब खत्म किया है।’

शबनम के चाचा और चाची दोनों उसे लेकर बहुत तल्ख हैं। कहते हैं, ‘अब तक तो फांसी लगकर उसका खेल भी खत्म हो जाना चाहिए था। सरकार पता नहीं उसे क्यों पाल रही है? यदि किसी इस्लामी देश में उसने ऐसा किया होता तो उसे कब का फांसी पर चढ़ा दिया गया होता।’ शबनम की चाची फातिमा को उसे लेकर कोई अफसोस नहीं है। बात करते-करते वे अपनी हंसी छुपाने की कोशिश करती हैं, लेकिन उनके चेहरे पर हंसी आ ही जाती है।

लेकिन, हत्याकांड के समय गांव के प्रधान रहे आस्ताने अली कहते हैं, ‘शबनम को फांसी नहीं होनी चाहिए भले ही वो जेल में सड़ जाए। उसकी प्रॉपर्टी या तो उसके बेटे को मिले या सरकार जब्त कर ले। उसके चाचा तो संपत्ति बेचते जा रहे हैं।’

सलीम की मां कहती हैं- मेरा बेटा ऐसा नहीं कर सकता
सलीम का परिवार भी बावनखेड़ी के पास के ही मजरे बड़ई में रहता है। वहां ज्यादा बात करने को कोई तैयार नहीं होता। बस उसकी मां कहती हैं, ‘हम जेल में जब भी सलीम से मिले, उसने यही कहा कि मुझे छुड़ा लो।’ वे कहती हैं, ‘मैं मां हूं, मैं जो सोचती हूं, बता नहीं सकती। मुझे यकीन नहीं है कि मेरा बेटा ऐसा कर सकता है। मैं तो यही दुआ करती हूं कि अल्लाह मेरा बेटा मुझे लौटा दे।’ क्या वे कभी भी शबनम-सलीम के बेटे ताज से मिली हैं? इस पर उनकी आंखों में आंसू आ जाते हैं। आंसू पोंछते हुए कहती हैं, ‘मैं उस बच्चे के बारे में क्या कहूं, वो तो मासूम है।’

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