Saturday, March 6, 2021
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Most Demand Jobs 2021 Amid Coronavirus Outbreak; Here’s Latest Linkedin Report | कोरोना लॉकडाउन में गई करोड़ों लोगों की नौकरी, लेकिन इन 15 नौकरियों की बढ़ी डिमांड

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37 मिनट पहले

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कोरोना लॉकडाउन के दौरान देश में 12.2 करोड़ लोग हुए बेरोजगार हुए। लॉकडाउन के दौरान जब कई सेक्टर में बड़े पैमाने पर नौकरियां जा रही थीं, उस वक्त कुछ ऐसे बिजनेस भी थे जिनकी मांग तेजी से बढ़ रही थी। लिंक्डइन ने ऐसे ही 15 सेक्टर की एक लिस्ट जारी की है, जिनमें नौकरियों की मांग लॉकडाउन के दौरान बढ़ी और यह ट्रेंड अभी भी बरकरार है।

ऐसा ही एक सेक्टर एडटेक है। एडटेक कंपनी अपग्रेड के CEO अर्जुन मोहन बताते हैं कि कंपनी का रेवेन्यू पिछले 9 महीने में दोगुना हो गया है। इसके अलावा इस पर रजिस्टर करने वाले लोगों की संख्या भी दोगुनी हुई। इससे अपग्रेड के कुल यूजर की संख्या 10 लाख के पार चली गई। कंपनी ने अपने कर्मचारियों की सैलरी 44% बढ़ा दी है। कंपनी ने साल 2022 के लिए अपना प्रोजेक्टेड टारगेट इस साल कमाए 1200 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 2500 करोड़ रुपए कर दिया है।

इतनी बुरी परिस्थिति में भी जो नौकरियां तेजी से बढ़ रही थीं, उन्हें लेकर हमने अर्थशास्‍त्री व स्टार्टअप गुरु शरद कोहली से बात की। उन्होंने अलग-अलग सेक्टर में नौकरियों के बढ़ने की वजह बताई-

फ्रीलांस कंटेट क्रिएटर
वजहः
लॉकडाउन में लोगों की नौकरियां गईं। नौकरी गंवाने वाले कई लोगों ने अपने स्टार्टअप भी शुरू किए। किसी भी स्टार्टअप के लिए जरूरी है कि लोग उन्हें जानें और सही तरीके से किसी कंपनी के बारे में बताने के लिए प्रोफेशन कंटेंट क्रिएटर्स की जरूरत पड़ती है। इसमें लोगो डिजाइन और वीडियो कंटेंट क्रिएटर भी शामिल हैं।

सोशल मीडिया और डिजिटल मार्केटिंग
वजहः
लॉकडाउन में अखबार बंद हो गए, टीवी की TRP गिर गई। इधर सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर समय बिताना शुरू किया। सबसे अहम बात ये कि आज भी अखबार और टीवी में प्रचार कराना महंगा है, जबकि सोशल मीडिया का प्रमोशन 100 रुपए से भी शुरू हो सकता है। इसलिए लोगों ने ऐसे लोगों को ढूंढ़ा जो सोशल मीडिया के एक्सपर्ट हों।

मार्केटिंग और बिजनेस डेवलपमेंट एंड सेल्स
वजहः
डिस्ट्रिब्यूशन काम ठप हुआ। मौजूदा बिजनेस भी घाटे में जा रहे थे। ऐसे में इन दोनों जॉब्स में खासी गिरावट आने के अनुमान थे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। क्योंकि यही लोग, जो चिप्स बेच रहे थे, रियल इस्टेट में काम कर रहे थे, वकालत कर रहे थे, उन्होंने अपना असली काम छोड़ PPE किट्स, सैनिटाइजर और मास्क बनाने वाली कंपनियों के लिए मार्केटिंग का काम शुरू कर दिया। नए लोग बिजनेस के लिए आए तो उन्हें बिजनेस डेवलपमेंट और सेल्स के लोगों की भी जरूरत पड़ी।

स्पेशलाइज्ड इंजीनियरिंग
वजह:
ये खास नौकरी केवल हेल्‍थेकयर सेक्टर में ही बढ़ी। पहले अधिकांश थर्मामीटर चीन से मंगाए जाते थे, लॉकडाउन में यही बनना शुरू हुआ, इसी तरह ऑक्सीमीटर, पैर से चलने वाली सैनिटाइजर मशीन बनी। इन सब के लिए स्पेशलाइज्ड इंजीनियरिंग की जरूरत बढ़ी।

फाइनेंस
वजह:
कंपनियों का बजट बिगड़ गया था। कंपनी में जो 10 अकाउंटेंट काम कर रहे थे, उनके काम को सस्ते में कराने का तरीका ढूंढा जाना था ताकि कंपनी पर भार कम हो। आत्मनिर्भर भारत अभियान में लोन लेने के लिए भी इनकी सहायता चाहिए होती है। ऐसे में तीन-चार साल की बैलेंस सीट, बिजनेस प्लान तैयार करना था। यह काम फाइनेंस सेक्टर में काम करने वालों से कराया गया, इसलिए नौकरियां बढ़ीं।

एजुकेशन
वजह:
एजुकेशन सेक्टर में बेहद कम नौकरियां जाती हैं। कई ऐसे उदाहरण हैं जो अध्यापक छात्रों को बेहद शानदार तरीके से पढ़ाते हैं, लेकिन उन्हें लैपटॉप, मोबाइल फोन चलाना नहीं आता। ऐसे में पुराने टीचर्स को निकालने के बजाए ऐसे टीचर्स की भर्ती की गई जो तकनीकी को अच्छे से समझते हैं। नौकरियां इसलिए भी नहीं गईं क्योंकि स्कूलों की फीस में कमी नहीं हुई थी। यही वजह है कि इस सेक्टर में जॉब पहले से कम नहीं हुईं बल्कि बढ़ीं।

डेटा साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (IT)
वजह:
लॉकडाउन के दौरान पढ़ाई से लेकर, शॉपिंग तक ऑनलाइन हो रही थी। इसलिए ऐसे लोगों की मांग बढ़ी जिन्हें डेटा एनालिस्टिक का काम आता था या जिन्होंने सीखा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का काम इसलिए बढ़ा, क्योंकि यह कई महीने का काम कुछ मिनटों में कर देता है। इसी वजह से TCS, इंफोसिस, टेक महिंद्रा में अभी और भर्तियां होने जा रही हैं।

ई-कॉमर्स
वजह:
मार्केट बंद था। खाने की शॉपिंग से लेकर हर छोटी-बड़ी चीज लोग ऑनलाइन खरीदने लगे। दुकानें खुलने के बाद भी अब लोग वहां जाकर केवल सामान देख रहे हैं और घर आकर ऑनलाइन खरीदारी कर रहे हैं।

साइबर सिक्योरिटी
वजह:
डिजिटल होने के चक्कर में लोगों ने अपनी काफी जानकारियां ऑनलाइन कर दीं। 1 करोड़ से ज्यादा नए डीमैट अकाउंट खुले। ऑनलाइन पैसे का लेन-देन बढ़ा। ऐसे में स्वाभाविक है कि जब कोई सेक्टर आगे बढ़ता है तो अपने किस्म की चुनौतियां लेकर आता है। चीजों के ऑनलाइन होते ही हैकर खतरा बन गए। उन्हें संभालना था, इसलिए साइबर सिक्योरिटी की नौकरियां बढ़ीं। एंटी वायरस बेचने वाली कंपनी क्विकहील का बिजनेस इसी दौर में डबल हुआ।

हेल्थकेयर
वजह:
कोरोना इतनी बड़ी महामारी थी कि इस सेक्टर में उछाल आना ही था। यही एक सेक्टर है जिसमें काम करने वाले कई ऐसे लोग हैं जो एक दिन भी अपने घर में नहीं बैठे। साथ ही वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों के साथ आयुर्वेद, योग सभी से जुड़े क्षेत्रों में लोगों को जमकर नौकरियां मिलीं।

ह्यूमन रिसोर्स
वजह:
सुनने में अटपटा लग सकता है कि आखिर सबकी नौकरियां जा रही थीं, उस समय HR की नौकरियां कैसे बढ़ रही थीं? दरअसल लॉकडाउन में लोगों की नौकरियों से निकालने का काम इसी विभाग से कराया गया। इन्हें ही कर्मचारी को समझाने-बुझाने से लेकर उससे जुड़ा डॉक्यूमेंटेशन करना पड़ा। साथ ही लॉकडाउन के दौरान कई कंपनियों को महसूस हुआ कि HR का काम अब बिना HR रखे नहीं चल सकता, क्योंकि प्रक्रिया जटिल हो गई है। जबकि पहले कई छोटी कंपनियों के मालिक, MD, मार्केटिंग वाले ही HR काम भी कर देते थे या बस एक HR रखते थे।

यूजर एक्सपीरियंस डिजाइनर
वजह:
लॉकडाउन में इस नौकरी की मांग सबसे ज्यादा बढ़ी। दरअसल, अब कस्टमर को केवल यूजर एक्सपीरियंस से प्रभावित किया जा सकता है, क्योंकि कस्टमर आपके सामने नहीं है। ऐसे में अगर किसी यूजर का एक्सीरिएंस बिगड़ता है तो कंपनी तुरंत अपना एक कस्टमर गंवा देती है। इस सेक्टर में भर्तियां तेजी से बढ़ने की यही वजह रही। यही वजह है कि ओला, उबर, वॉट्सऐप से लेकर डिलिवरी बॉयज तक यूजर के रिव्यू लेने के लिए लालायित रहते हैं। सभी कंपनियों नेे अपने यहां अलग से विभाग बना लिया है। पहले कंपनियों में शायद ही कोई एक या दो लोग इस काम को करते थे।

कस्टमर सपोर्ट
वजह:
हाल ही में जनवरी के टेलीकॉम यूजर्स के नए सब्सक्राइबर्स की जानकारी सामने आई। इसमें बताया गया कि एयरटेल के एक महीने में 47 लाख और जियो के महज 4 लाख सब्सक्राइबर बढ़े। इसके पीछे की वजह कस्टमर सपोर्ट ही है। क्योंकि एयरटेल लगातार छह महीने से अपने कस्टमर सपोर्ट को सुधारने में लगा है।

छोटे शहरों में नौकरियों को लेकर लोग खुश नहीं
लिंक्डइन के एडिटर अंकित वेंगलुरकर कहते हैं, कंटेट क्रिएटर के लिए यह बहुत अच्छा दौर है। और उनके लिए अलग-अलग शहरों की दूरियां पूरी तरह से मिट चुकी हैं। ऐसे में अगर कोई जयपुर, भोपाल, इंदौर, बेंगलुरु या बेलगाम में रहता है तो भी वह अपने भविष्य के क्लाइंट से बहुत आसानी से जुड़ सकता है। भले ही उसका क्लाइंट दुनिया के किसी भी देश में रहता हो, क्योंकि सभी अलग-अलग जगहों से काम कर रहे हैं। लेकिन महामारी के बावजूद छोटे शहरों में उतनी तेजी से काम के अवसर नहीं बढ़े हैं। यह बात लिंक्डइन के एक सर्वे में भी सामने आई है।

इस सर्वे में लिंक्डइन यूजर्स से पूछा गया था, आप अभी अपने शहर में मौजूद नौकरी के अवसरों के बारे में क्या सोचते हैं? इसके जवाब में सबसे ज्यादा लोगों ने कहा कि उनके शहर में नौकरी के अवसर कोविड-19 के बाद कम हुए हैं। जबकि 19% लोगों ने कहा है कि यह पहले जैसे ही हैं। सिर्फ 17% ने कहा कि WFH जैसे अवसरों के लिए अवसर बढ़े हैं।

अहमदाबाद और पुणे में कर्मचारी अपनी नौकरियों को लेकर संतुष्ट
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​डेलॉयट इंडिया के चीफ टैलेंट ऑफिसर और पार्टनर नाथन एसवी भी इस बात पर मुहर लगाते हैं। उनका कहना है, यह कहने में अच्छा है कि कोई भी कहीं से भी काम कर सकता है, लेकिन यह मुश्किल है और लोग घर से काम करके थक गए हैं। मुझे आशा है कि भविष्य में और भी लोग WFH के महत्व को समझेंगे।’

इसके अलावा हाल ही में जारी किए गए लिंक्डइन वर्कफोर्स कॉन्फिडेंस इंडेक्स के मुताबिक अहमदाबाद और पुणे ऐसे शहर हैं, जहां लोग अपनी नौकरियों का भविष्य अच्छा देखते हैं। यहां कर्मचारी मानते हैं कि उनकी जॉब सिक्योर है। इस सर्वे में 8 शहर शामिल थे। इनमें से मुंबई और हैदराबाद के लोग अपनी नौकरियों के भविष्य को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित थे। जबकि चेन्नई, कोलकाता, दिल्ली और बेंगलुरु के लोग इस लिस्ट में बीच में थे।

इस तरह से किया गया सर्वे
लिंक्डइन के डेटा साइंटिस्ट ने इस सर्वे के लिए 15 हजार से ज्यादा नौकरियों को 25 कैटेगरी में रखा। अप्रैल 2020 से अक्टूबर 2020 के बीच इन 25 कैटेगरी की 15 हजार से ज्यादा नौकरियों के ट्रेंड का अध्ययन किया। 2019 की इसी अवधि के आंकड़े से तुलना करने पर जिन 15 कैटेगरी में सबसे ज्यादा नौकरियों की मांग बढ़ी उनकी लिस्ट जारी की गई है।

देश में कुल नौकरियों की स्थिति नहीं रही अच्छी, बेरोजगारी दर 28-30% तक पहुंची
इन सेक्टर में भले ही नौकरियां बढ़ीं हों, लेकिन पूरे देश में नौकरियों की हालत अच्छी रही हो, ऐसा नहीं है। अर्थशस्‍त्री शरद कोहली कहते हैं कि ‘हमारे देश में लेबर लॉ आज भी ऐसे हैं कि कंपनियां किसी को भी 30 दिन या 60 दिन के नोटिस देकर बाहर कर सकती हैं। कई पश्चिमी देश ऐसे हैं, जहां आसानी से एक भी कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाला जा सकता। ये भी सच है कि कुछ चुनिंदा कंपनियां हैं जिन्होंने लॉकडाउन के दौरान कर्मचारियों के बेतन भी बढ़ाए, लेकिन इससे कई गुना बड़ी सच्चाई ये है कि लॉकडाउन के दौरान 28-30% तक बेरोजगारी दर पहुंच गई थी। अब जब फिर से बेरोजगारी दर 8-9% पर आ गई है तब भी जैसी नौकरियां लोग पहले कर रहे थे वैसी नहीं कर रहे है। कोई कम सैलेरी में तो कोई अपने स्किल के विपरीत घर चलाने के लिए कुछ भी कर रहा है।’

Source by [author_name]

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