Friday, February 26, 2021
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Story of 3 victims: saw the husband’s face for the first time in the wedding pavilion, after that it was destroyed | शादी के मंडप में देखा था पहली बार पति का चेहरा, उसके बाद मिली तो मेरा सुहाग उजड़ चुका था

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बेहमई5 दिन पहलेलेखक: रवि श्रीवास्तव

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  • गांव की ही एक महिला सुनीता बताती हैं कि वो खेत पर गई हुई थीं, जब लौट कर आई तो घर में पिता, चाचा और बाबा की लाशें पड़ी हुई थीं
  • इस कांड के 5 आरोपित डकैतों में एक की मौत हो गई है, जबकि एक जेल में है, बाकी 3 जमानत पर बाहर हैं

राजधानी लखनऊ से 171 किमी की दूरी पर कानपुर देहात में एक छोटा सा गांव बेहमई है। यहां 40 साल पहले यानी 14 फरवरी 1981 को फूलन देवी और उसके 35 साथियों ने 26 लोगों को कतार में खड़ा कर गोलियों से भून दिया था। लेकिन, 6 लोग जिंदा बच गए थे। इस बहुचर्चित हत्याकांड के कई चश्मदीद गुजर चुके हैं। जो जिंदा हैं, वे उस शाम को याद कर सिहर उठते हैं। कहते हैं कि करीब 5 मिनट तक गांव गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा था। जब बंदूकें शांत हुई तो लाशों का ढेर लग चुका था। लेकिन, इतना वक्त गुजर जाने के बाद भी ‘न्याय’ अदालत में दलील और बहस के बीच पिस रहा है। पीड़ित परिवारों ने न्याय की आस ही छोड़ दी है।

बेहमई कांड में विधवा हुईं 20 महिलाओं में से 14 की मौत हो चुकी है। बाकी बचीं महिलाओं में से कुछ गांव छोड़कर चली गईं। कुछ हैं जिन्होंने न्याय की आस छोड़ दी है। आज भी वे उस दिन को याद कर भावुक हो उठती हैं।

शादी के मंडप के बाद पति की लाश देखी थी

गांव के बीच बने एक पक्के मकान के बाहर अलाव जल रहा था। वहां दो-तीन महिलाएं बैठी थीं। पास ही कुछ पुरुष भी बैठे थे। वहीं, बेहमई कांड की पीड़ित मुन्नी देवी भी अलाव ताप रही थीं। जब बेहमई कांड के बारें में उनसे पूछा गया तो उनके भीतर अदालत और सरकार के प्रति नाराजगी थी। कुछ देर शांत रहने के बाद रुंधे गले और आंख में आंसू लिए मुन्नी देवी ने कहा कि जब बेहमई कांड हुआ तब मेरी उम्र महज 11 साल की थी। उस समय शादियां जल्दी हो जाया करती थीं। मैंने अपने पति लाल सिंह का चेहरा सिर्फ मंडप पर ही देखा था। उसके बाद सिर्फ पति लाल सिंह की लाश ही देखी।

ये मुन्नी देवी हैं। जिनके पति की हत्या फूलन देवी ने की थी। तब मुन्नी देवी महज 11 साल की थीं।

ये मुन्नी देवी हैं। जिनके पति की हत्या फूलन देवी ने की थी। तब मुन्नी देवी महज 11 साल की थीं।

अब उम्र 51 साल की हो गई हूं। न कोई मेरे आगे है न ही मेरे पीछे। एक विधवा के रूप में मैंने 40 साल कैसे काटे हैं? उसकी दास्तां भी मैं बता नहीं सकती हूं। एक-एक रोटी को मोहताज होना पड़ा है। लेकिन न तो कभी सरकार ने सुध ली और न ही किसी और ने। वक्त ने एक समय के बाद माता-पिता को और फिर सास-ससुर को भी छीन लिया। एक के बाद एक अपने मुझे छोड़कर इस दुनिया को अलविदा कहते चले गए। मैं पढ़ी-लिखी नहीं हूं। लेकिन जिस दिन कोर्ट में तारीख होती थी, उस दिन यह उम्मीद लगाकर बैठती थी कि शायद आज मेरे पति को कोर्ट से न्याय मिल जाए। लेकिन, साल दर साल बीतता चला गया, उम्र बढ़ती चली गई। अब तो आंखें भी कमजोर हो गई हैं और अब न्याय की आस भी खत्म सी होने लगी है।

घर में पड़ी थी पति समेत तीन लाशें, घर के सभी मर्दों को मार दिया था

66 साल की श्रीदेवी के पति, जेठ व ससुर की हत्या फूलन देवी ने की थी। इस समय वह बीमार हैं। उनकी बेटी सुनीता कहती हैं कि वो मंजर मेरा परिवार कभी भूल नहीं सकता है। उस दिन दोपहर दो से ढाई के बीच का वक्त था। तब फूलन और उसके साथियों ने गांव को घेरना शुरू कर दिया था। शुरुआत में लोगों ने ध्यान नहीं दिया, क्योंकि डाकुओं के ज्यादातर गैंग इसी गांव से होकर गुजरते थे। लेकिन, कुछ देर बाद गांव में शोर मचने लगा। डकैत लूटपाट करने लगे। इसके बाद घर के मर्दों को एक टीले के पास इकट्ठा कर सभी को गोली मार दी।

तस्वीर बेहमई गांव की है। गांव के लोग आज भी उस कांड को याद कर सिहर उठते हैं।

तस्वीर बेहमई गांव की है। गांव के लोग आज भी उस कांड को याद कर सिहर उठते हैं।

उस वक्त मैं अपनी मां श्रीदेवी के साथ खेत गई थी। जब लौट कर आई तो घर में पिता, चाचा और बाबा की लाशें पड़ी थीं। तब मेरी उम्र 6 साल की थी। सुनीता कहती हैं कि पिता को खोने के बाद सिर्फ मां ही एकमात्र सहारा थी। उस समय मां की उम्र 24 साल की थी। परिवार को पालने के लिए मां ने एक टाइम खाली पेट रहकर अपने 3 बच्चों का पेट भरा है। न्याय की आस लगाए मां ने अपने जीवन के 40 साल सिर्फ इंतजार में ही काट दिए हैं। लेकिन न्याय आज तक नहीं मिला है। मां के इन आंसुओं का हिसाब न तो सरकार आज तक कर पाई न ही अदालत।

काली मइया की जय बोल चली दी ताबड़तोड़ गोलियां

50 वर्षीय लल्लन सिंह कहते हैं कि जिस समय यह कांड हुआ, तब वे लगभग 10 साल के रहे होंगे। उस दिन दोपहर का वक्त था। जब डाकू गांव में आए तो ज्यादातर मर्द घर पर ही थे। फूलन ने हर घर से मर्दों को टीले के पास इकट्‌ठा करना शुरू किया। टीले के पास गांव के 23 लोग और 3 मजदूर पकड़कर लाए गए थे। अचानक से फूलन ने काली मइया की जय बोलते हुए गोलियां चला दीं। सब भरभराकर गिर पड़े। एक साथ 20 लोगों को गोली मार दी थी। करीब ढाई घंटे गांव में रहने के बाद फूलन अपने साथियों के साथ वहां से निकल गई। इतनी गोलियां चली थीं कि कई किमी तक उसकी आवाज सुनाई दी थी। कई घंटों तक महिलाओं के रोने की आवाज आती रही। जानवर चिल्ला रहे थे। अजीब दहशत भरी शाम थी। तकरीबन 3 से 4 घंटे बाद पुलिस पहुंची थी।

बेहमई कांड में मारे गए लोगों के स्मारक की तस्वीर। फूलन और उसके साथियों ने 26 लोगों को गोलियों से भून डाला था।

बेहमई कांड में मारे गए लोगों के स्मारक की तस्वीर। फूलन और उसके साथियों ने 26 लोगों को गोलियों से भून डाला था।

लल्लन सरकार पर सवाल खड़े करते हुए कहते हैं कि यदि सरकार ने ध्यान दिया होता तो शायद पीड़ितों को इंसाफ भी मिल गया होता और गांव की खुशियां भी वापस लौट आई होतीं। लेकिन अब ऐसा होता नजर नहीं आ रहा है। क्योंकि लंबा समय बीत चुका है।

अब तक केस में क्या हुआ?

बेहमई कांड के बाद कई आरोपित डकैतों मार गिराए गए। वहीं, फूलन मध्य प्रदेश में समर्पण कर जेल चली गई। जेल से लौटकर फूलन सांसद बनीं। 2001 में दिल्ली में फूलन की हत्या हो गई। लेकिन, बेहमई केस की अदालती सुनवाई 2011 में शुरू हुई। 5 आरोपित डकैतों में एक की मौत हो गई। जबकि एक जेल में है। बाकी 3 जमानत पर बाहर हैं। केस के मुख्य वादी और चश्मदीद राजा राम सिंह (72) की कुछ दिन पहले मौत हो गई है। दिसंबर-2019 में अंतिम बहस के बाद कानपुर देहात की विशेष अदालत एंटी डकैती ने जनवरी-2020 में सजा सुनाने का ऐलान किया था। लेकिन मूल केस डायरी नहीं मिली। अदालत ने कर्मचारी को नोटिस और पुलिस को जांच का आदेश दिया। लेकिन, अब तक फैसला नहीं आया है। इस कांड के सिर्फ 4 बुजुर्ग प्रत्यक्षदर्शी या पीड़ित बचे हैं।

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