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Tuesday, March 2, 2021
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Been a teacher for ten years; Due to Corona, he was disturbed in the job and started cultivating strawberries with a friend, today he is earning millions | 10 साल टीचर रहे, कोरोना में नौकरी में परेशानी आई तो स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की, आज लाखों का मुनाफा

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वाराणसी20 घंटे पहलेलेखक: अमित मुखर्जी

वाराणसी के रहने वाले रमेश मिश्रा अपने दोस्त मदन मोहन तिवारी के साथ मिलकर दो एकड़ में स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं।

बनारस के रहने वाले रमेश मिश्रा एक प्राइवेट स्कूल में टीचर थे। सब सामान्य चल रहा था, लेकिन फिर कोरोना आया और चीजें बदलने लगीं। स्कूल की नौकरी में परेशानियां आने लगीं तो वह नौकरी छोड़ दी। पर, अब सवाल ये था कि किया क्या जाए? रमेश ने काफी सोच-विचार के बाद स्ट्रॉबेरी की खेती करने का फैसला किया। उनके एक दोस्त का काम भी कोरोना के चलते बंद हो गया था, उन्हें भी साथ लिया और स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू कर दी। शुरुआत में कुछ मुश्किलें आईं, लेकिन अब यह खेती रमेश को लाखों रुपए का मुनाफा दे रही है। बता दें कि फूड और कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में स्ट्रॉबेरी की काफी डिमांड है।

रमेश पुणे गए और वहां कई हफ्ते रहकर उन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती की बारीकियां समझीं, इसके बाद वाराणसी आकर खेती शुरू की।

रमेश पुणे गए और वहां कई हफ्ते रहकर उन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती की बारीकियां समझीं, इसके बाद वाराणसी आकर खेती शुरू की।

लॉकडाउन की मुसीबत में निकाला नया रास्ता
रमेश मिश्रा बनारस के पास के एक गांव के हैं। BHU से ग्रेजुएट हैं और बास्केटबॉल में इंटर यूनिवर्सिटी लेवल तक खेल चुके हैं। टीचिंग का दस साल से भी ज्यादा का अनुभव है। रमेश बताते हैं, ‘लॉकडाउन लगने के बाद लोगों की नौकरियां लगातार जा रहीं थीं। मैं भी दूसरा काम देख रहा था। रोज घंटों इंटरनेट पर सर्च किया करता था कि क्या किया जा सकता है, लेकिन कुछ सूझ नहीं रहा था। कुछ लोगों ने बताया कि स्ट्रॉबेरी की खेती में काफी मुनाफा है, लेकिन मैं इसके बारे में कुछ जानता नहीं था। आसपास के इलाके में भी स्ट्रॉबेरी की खेती कोई नहीं करता था कि कुछ जानकारी जुटा सकूं।’

बाद में इंटरनेट पर ही रमेश को पता चला कि पुणे में स्ट्रॉबेरी की खेती करने वाले काफी लोग हैं। इसके बाद वे पुणे गए और वहां कई हफ्ते रहकर स्ट्रॉबेरी की खेती की बारीकियां समझीं। वे बताते हैं, ‘पुणे में पौधों के रखरखाव, टपक विधि से सिंचाई जैसीं चीजें सीखीं। इस बात का भी अंदाजा लगा कि इस खेती के लिए शुरुआत में कितनी जमीन चाहिए और इसमें कितना पैसा लगेगा।’

स्ट्रॉबेरी के पौधों की देखभाल बच्चों की तरह करनी होती है, इसके लिए रमेश ने सात महिलाओं को काम पर रखा है, जो इन पौधों की देखभाल करती हैं।

स्ट्रॉबेरी के पौधों की देखभाल बच्चों की तरह करनी होती है, इसके लिए रमेश ने सात महिलाओं को काम पर रखा है, जो इन पौधों की देखभाल करती हैं।

पुणे से 15 हजार पौधे मंगवाए, एक पौधे की कीमत 15 रुपए थी

स्ट्रॉबेरी की खेती मुनाफे की खेती बने, इसके लिए कम से कम दो एकड़ जमीन चाहिए थी। रमेश बताते हैं कि मेरे पास इतनी जमीन नहीं थी, लेकिन यह मुश्किल भी हल हुई। वे बताते हैं, ‘मेरे दोस्त मदन मोहन तिवारी का रेलवे में सप्लाई का काम था, लेकिन कोरोना के कारण वह भी बंद था। मैंने उनके सामने स्ट्रॉबेरी की खेती करने का प्रस्ताव रखा तो वह तैयार हो गए।’ मदन के साथ जुड़ जाने के बाद जमीन की दिक्कत भी हल हो गई। मदन ने तीन एकड़ की व्यवस्था की। जिसमें से दो एकड़ में स्ट्रॉबेरी और एक एकड़ में सब्जियां लगाई गईं।

मदन कहते हैं, ‘कोरोना के कारण पुराना काम ठप था, लग रहा था कि सब खत्म हो रहा है। इसलिए रमेश के साथ स्ट्रॉबेरी की खेती में हाथ आजमाया। जमीन और पानी की जांच करवाई। पुणे से 15 हजार पौधे मंगवाए। हमें स्ट्रॉबेरी का एक पौधा 15 रुपए का पड़ा। इसके अलावा हमने स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर- ड्रिप इरिगेशन के लिए सेटअप आदि की भी व्यवस्था की। फिर ऑर्गेनिक तरीके से खेती शुरू की और आज हम मुनाफे में हैं।’ रमेश भी उनकी बात दोहराते हैं, ‘लॉकडाउन की सबसे बड़ी सीख यही है कि नौकरी से कोई कभी भी निकाला जा सकता हैं, इसलिए कुछ अपना काम होना चाहिए।’

रमेश बताते हैं कि शुरुआत में दो एकड़ में स्ट्रॉबेरी लगाने में 7 से 8 लाख रुपए खर्च हुए होंगे। इसके अलावा स्ट्रॉबेरी की खेती बहुत देखभाल की मांग करती है। वे कहते हैं, ‘स्ट्रॉबेरी के पौधों की देखभाल बच्चे की तरह करनी पड़ती है। हम दोनों सुबह ही खेत पर आ जाते हैं। घूम कर हर पौधे को चेक करते हैं। कोई पौधा मुरझा तो नही रहा। पौधों पर कहीं से भी मिट्टी नहीं जमा होनी चाहिए। दिन भर में कई बार डस्ट को साफ करना पड़ता हैं। इसके लिए गांव की सात महिलाओं को काम पर रखा है। चिड़ियों, कीड़ों से बचाने के लिए ऑडियो टेप के रील को पौधों से पांच से सात फिट ऊपर लटकाया जाता है, ताकि ये सुरक्षित रहें।

स्ट्रॉबेरी की पैकिंग का काम रमेश और मदन खुद ही करते हैं।

स्ट्रॉबेरी की पैकिंग का काम रमेश और मदन खुद ही करते हैं।

300 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बेचते हैं स्ट्रॉबेरी

पैदावार बेचने के बारे में रमेश बताते हैं, ‘नवंबर 2020 में हम लोगों ने दिल्ली माल भेजने के लिए बात की थी, लेकिन बाद में लोकल मार्केट से ही डिमांड आने लगी तो हम लोग बनारस और आसपास स्ट्राॅबेरी की सप्लाई करने लगे। यहां 300 रुपए प्रति किलो के हिसाब से हम स्ट्रॉबेरी बेचते हैं। एक पौधे से 500 से 700 ग्राम तक स्ट्रॉबेरी की पैदावार होती है।’

कैसे करें इसकी खेती?
स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए बलुई मिट्टी या दोमट मिट्टी अच्छी होती है। अगस्त-सितंबर महीने में इसके पौधे लगाए जाते हैं। इसके लिए तापमान 30 डिग्री से ज्यादा नहीं होना चाहिए। अगर गर्मी बढ़ती है तो फसल को नुकसान होता है। हालांकि ज्यादा टेम्परेचर वाली जगहों पर भी लोग अब इसकी खेती करने लगे हैं।

रमेश कहते हैं, ‘चूंकि स्ट्रॉबेरी की खेती में देखभाल की बहुत जरूरत होती है, इसलिए इसे ज्यादा जमीन पर नहीं करना चाहिए, वर्ना आप पूरी फसल की देखभाल नहीं कर पाएंगे। बड़े पैमाने पर स्ट्रॉबेरी की खेती तभी करनी चाहिए, जब आपके पास उसकी देखभाल के लिए पर्याप्त संसाधन हों, नहीं तो नुकसान का भी खतरा रहता है।’

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